Dollar के मुकाबले भारतीय Rupee क्यों गिर रहा है? यहाँ जानिए…!

Dollar Vs Rupee: अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया क्यों गिर रहा हैं, क्या वजह है रुपए दिनोंदिन डॉलर के मुकाबले कमजोर हो रहा है इसके अलावा रुपए में कमजोरी का असर अर्थव्यवस्था पर और आम आदमी की जेब पर कैसे होगा। जब भी देश की रुपए कमजोर होता है बता दें की रुपये में कमजोरी आने पर घरेलू स्तर पर महंगाई और बढ़ने लगती है क्योंकि आयातित वस्तुएं महंगी होने लगती हैं।

Dollar Vs Rupee,

मुंबई, जुलाई 12| Dollar | Rupee | Economy: डॉलर (USD) के मुकाबले रूपया (Indian Rupee) दिनोंदिन गिरता जा रहा है। आज डॉलर के मुकाबले रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ। डॉलर के मुकाबले 19 पैसे टूट कर 79.49 के स्तर पर बंद हुआ। बता दें कि डॉलर के मुकाबले रुपया आज 2 पैसे कमजोर होकर 17.25 के मुकाबले 79.27 पर खुला था।

हाल ही में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि भारतीय मुद्रा ग्रीनबैक के मुकाबले अन्य वैश्विक मुद्राओं की तुलना में बेहतर स्थिति में है। आखिर डॉलर के मुकाबले रुपए में इतनी अधिक गिरावट क्यों आ रही है और आम आदमी के जीवन पर इसका क्या असर होगा। तो चलिए जानते हैं कि आखिर डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया क्यों गिर रहा है इसकी वजह क्या है।

क्यों डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया गिर रहा है?

भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले सबसे निचले स्तर पर क्यों आ गया । डॉलर के मुकाबले 19 पैसे टूट कर 79.49 के स्तर पर बंद हुआ। इन दिनों रुपए की गिरावट मुख्य रूप से कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, विदेशों में मजबूत डॉलर और विदेशी पूंजी के बहेरवा के कारण है। फॅमिली चुनौतियां इन्फ्लेशन और क्रूड उँची कीमतों की वजह से इस साल की शुरुआत से रुपए में गिरावट आ रही है।

इसके अलावा ऍसे भारी विदेशी फंड का आउटफ्लो हुआ है क्योंकि विदेशी संस्थागत निवेशकों ने इस साल अब तक 28.4 बिलियन डॉलर के शेयर बेचे हैं, जो कि 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान देखी गई थी. वहीं अब तक 11.8 बिलियन डॉलर की बिकवाली से बहुत अधिक हो गई है। जोकि इस वर्ष में अब तक डॉलर के मुकाबले रुपये में 5.9 फीसदी की गिरावट देखी गई हैं।

उच्च आयात कीमतों से बढ़ता है दबाव

जैसे-जैसे पैसा भारत से बाहर जाता है, रुपया-डॉलर की विनिमय दर प्रभावित होती है और रुपये का अवमूल्यन होता है. इस तरह का मूल्यह्रास कच्चे माल और कच्चे माल की पहले से ही उच्च आयात कीमतों पर काफी दबाव डालता है, उच्च खुदरा मुद्रास्फीति के अलावा उच्च आयातित मुद्रास्फीति और उत्पादन लागत का मार्ग प्रशस्त करता है.

रुपये में कमजोरी का अर्थव्यवस्था पर असर?

भारत ज्यादातर आयात पर निर्भर है, जिसमें कच्चे तेल, धातु, इलेक्ट्रॉनिक्स आदि शामिल हैं. वहीं आयात का बिल चुकाने के लिए हमको अमेरिकी डॉलर में भुगतान करना पड़ता है. चूंकि, अब रुपया कमजोर है तो उतनी ही मात्रा में सामान के लिए ज्यादा कीमत चुकानी पड़ती है. ऐसे में मामलों में, कच्चे माल और उत्पादन की लागत बढ़ जाती है, जिसका भार उपभोक्ताओं पर पड़ता है.

दूसरी ओर, कमजोर घरेलू मुद्रा निर्यात को बढ़ावा देती है क्योंकि शिपमेंट अधिक प्रतिस्पर्धी हो जाते हैं और विदेशी खरीदार अधिक क्रय शक्ति प्राप्त करते हैं.

रुपये में गिरावट का सबसे बड़ा असर महंगाई पर पड़ा है, क्योंकि भारत अपने कच्चे तेल का 80 फीसदी से ज्यादा आयात करता है, जो देश का सबसे बड़ा आयात है. इस साल फरवरी में यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के बाद से वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से अधिक बनी हुई हैं. तेल की ऊंची कीमतें और कमजोर रुपया अर्थव्यवस्था में मुद्रास्फीति के दबाव को बढ़ाता जा रहा है.

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कच्चे तेल की कीमतों का रुपये पर क्या असर होता है?

भारत अपनी 80 प्रतिशत से अधिक ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कच्चे तेल के आयात पर बहुत ज्यादा निर्भर करता है. जब भी तेल की कीमतों में तेजी आती है, तो यह रुपये पर दबाव डालता है क्योंकि भारत के आयात बिल कच्चे तेल की ऊंची कीमतों पर बढ़ जाते हैं.

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